जैव विविधता संशोधन कानून के बाद IPR आवेदनों में तेज बढ़ोतरी

Wed 01-Apr-2026,11:29 AM IST +05:30

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जैव विविधता संशोधन कानून के बाद IPR आवेदनों में तेज बढ़ोतरी Biodiversity-IPR-Growth-India-NBA-2026
  • जैव विविधता संशोधन अधिनियम 2023 लागू होने के बाद IPR आवेदनों में तेजी आई, NBA के अनुसार पंजीकरण प्रक्रिया अधिक पारदर्शी और जवाबदेह बनी।

  • बायोटेक, फार्मा, कृषि रसायन और फूड साइंस जैसे क्षेत्रों से बढ़ती भागीदारी, जैविक संसाधनों के औद्योगिक उपयोग में विस्तार का संकेत देती है।

Delhi / Delhi :

Delhi/ भारत में जैव विविधता और नवाचार के क्षेत्र में एक महत्वपूर्ण बदलाव देखने को मिल रहा है। राष्ट्रीय जैव विविधता प्राधिकरण (NBA) ने जैविक संसाधनों से जुड़े बौद्धिक संपदा अधिकार (IPR) आवेदनों में उल्लेखनीय वृद्धि दर्ज की है। यह वृद्धि सीधे तौर पर जैविक विविधता (संशोधन) अधिनियम, 2023 के प्रभावी क्रियान्वयन का परिणाम मानी जा रही है, जिसने इस क्षेत्र में नियामक प्रक्रियाओं को अधिक स्पष्ट और पारदर्शी बनाया है।

संशोधित कानून के तहत, जैविक संसाधनों पर आधारित किसी भी बौद्धिक संपदा अधिकार-विशेष रूप से पेटेंट-के लिए आवेदन करने से पहले आवेदकों को NBA से पंजीकरण प्रमाणपत्र (Certificate of Registration - CoR) प्राप्त करना अनिवार्य कर दिया गया है। इस प्रावधान ने न केवल प्रणाली में जवाबदेही और पारदर्शिता को बढ़ाया है, बल्कि यह भी सुनिश्चित किया है कि जैविक संसाधनों का उपयोग कानूनी और नैतिक मानकों के अनुरूप हो।

आंकड़ों के अनुसार, अप्रैल 2024 से मार्च 2025 के बीच लगभग 857 IPR आवेदन प्राप्त हुए, जिनमें से 792 को पंजीकरण प्रमाणपत्र जारी किए गए। इसके बाद अप्रैल 2025 से मार्च 2026 के बीच यह संख्या बढ़कर 1,077 आवेदनों तक पहुंच गई, जबकि 885 मामलों में CoR जारी किए गए। यह आंकड़े दर्शाते हैं कि संशोधित कानून के बाद न केवल आवेदनों में वृद्धि हुई है, बल्कि उनके निपटान की प्रक्रिया भी अधिक प्रभावी हुई है।

इन आवेदनों का दायरा भी काफी व्यापक है। जैव प्रौद्योगिकी, फार्मास्यूटिकल्स, कृषि रसायन, खाद्य विज्ञान, बायोकेमिस्ट्री, सूक्ष्म जीव विज्ञान, पॉलिमर तकनीक और बायोमेडिकल इंजीनियरिंग जैसे विभिन्न क्षेत्रों से आवेदन प्राप्त हुए हैं। यह संकेत देता है कि जैविक संसाधनों का उपयोग अब बहुआयामी औद्योगिक और वैज्ञानिक विकास के लिए किया जा रहा है।

विशेषज्ञों का मानना है कि यह बदलाव भारत में जिम्मेदार नवाचार (Responsible Innovation) को बढ़ावा दे रहा है। नए नियमों के तहत लाभ साझा करने (Benefit Sharing) के सिद्धांत को भी मजबूती मिली है, जिससे स्थानीय समुदायों और पारंपरिक ज्ञान धारकों को उचित लाभ मिल सके।

सरकार द्वारा प्रक्रियाओं को सरल और पारदर्शी बनाने से शोध संस्थानों और उद्योगों के लिए काम करना आसान हुआ है। साथ ही, इससे जैव विविधता संरक्षण और आर्थिक विकास के बीच संतुलन स्थापित करने में मदद मिली है।

कुल मिलाकर, जैविक विविधता (संशोधन) अधिनियम, 2023 ने भारत में अनुसंधान और नवाचार के नए द्वार खोले हैं। यह न केवल बौद्धिक संपदा प्रणाली को मजबूत कर रहा है, बल्कि देश को वैश्विक स्तर पर जैव-आधारित अर्थव्यवस्था में प्रतिस्पर्धी बनाने की दिशा में भी महत्वपूर्ण भूमिका निभा रहा है।